नई दिल्ली 4 अप्रैल: आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण 22 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर बढ़कर सात फीसदी हो गई। यह दर पिछले तीन वर्षो में सर्वाधिक है। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित यह दर इससे पहले के सप्ताह में 6.68 फीसदी थी।
पिछले माह की 15 तारीख को समाप्त हुए सप्ताह की तुलना में 22 तारीख को समाप्त हुए सप्ताह के बीच खनिज पदार्थो की कीमतों में 38 फीसदी और सब्जियों की कीमतों में 4.9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। इस दौरान दाल की कीमतों में 1.4 फीसदी और खाद्य तेलों की कीमतों में 1.6 फीसदी की तेजी आई।
ये सभी आंकड़े उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं। महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार द्वारा सोमवार को विभिन्न वस्तुओं पर आयात शुल्क कम किए जाने का असर अभी नहीं इन आकड़ों पर नहीं पड़ा है। सरकार ने आज कहा है कि बढ़ती कीमतों में कमी लाना उसकी पहली प्राथमिकता है।
इससे पहले वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने आज सिंगापुर में कहा, "हम जमा खोरों के खिलाफ कड़ा से कड़ा कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएंगे।"
आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।