बच गए याकूब कुरैशी के 51 करोड़ रुपएखबर है कि हजरत मौहम्मद साहब के कार्टून की श्रंखला बनाने वाले डेनमार्क के कॉर्टूनिस्ट कर्ट वेस्टरगार्ड की एक सोमालियाई युवक ने जान लेने की कोशिश की है। आपको याद होगा कि डेनमार्क के उस कार्टूनिस्ट का कत्ल करने वाले को...
बेगुनाहों को मारकर जन्नत नहीं दोजख मिलेगापाकिस्तान लम्बे अर्से से आतंकवाद की मार से कराह रहा है। इस्लाम के नाम पर गैर इस्लामी हरकतों की वजह से इस्लाम पूरी दुनिया में बदनाम हो रहा है। आखिर वे लोग कौन हैं, जो मस्जिदों में नमाजियों को गोलियों से..
26/11 से बड़ा था बाबरी मस्जिद पर हमला26/11 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले को एक साल हो गया। इस दिन पूरे देश ने हमले में मरने वालों को अपने-अपने तरीके से याद किया। 26/11 का हमला पाकिस्तान की शह पर हुआ था, जो हमारा दुश्मन है। लेकिन..
बेमतलब और बेमानी है, लिब्रहान रिपोर्ट6 दिसम्बर, 1992 को एक प्राचीन इमारत, जिसे मुसलमान बाबरी मस्जिद तो हिन्दुओं का साम्प्रदायिक वर्ग राम मंदिर होने का दावा करता था, जमींदोज कर दी गयी थी। उस दौर के लोग जानते हैं कि उस राष्ट्र विरोधी घटना को अंजाम..
सपा के ताबूत में आखिरी कीलपता नहीं हमारे सियासतदांओं को क्या हो गया है। इन्हें देखकर तो गिरगिट भी सोचता होगा कि ये तो मुझसे भी जल्दी और ज्यादा रंग बदलते हैं। फिरोजाबाद सीट हारते ही मुलायम सिंह ने अपने सखा कल्याण सिंह को दूध में..
संघ परिवार का 'लविंग जेहाद'यह बात तो माननी पड़ेगी कि संघ परिवार का 'थिंक टैंक' नए-नए मिथक गढ़ने में माहिर है। खासतौर से मुसलमानों के बारे में संघ परिवार ऐसे-ऐसे मिथक गढ़ता है कि कभी हंसी आती तो कभी संघ परिवार पर तरस आता है।..
वंदेमातरम् की नहीं, रोटी की बात करेंजमीयत उलेमा हिन्द के तीसवें अधिवेशन में वंदेमातरम् के गाने के खिलाफ फतवे ने एक बार फिर भूचाल ला दिया। सबसे पहले तो यह कि जब पहले से ही जमीयत का वंदेमातरम् पर रुख साफ है तो इस मुद्दे को क्यों..
नक्सलवाद से लड़ने के लिए सिस्टम बदलना जरुरी2 नवम्बर के दैनिक 'हिन्दुस्तान' में आइबीएन-7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष का एक आलेख 'सर कलम करने की विचारधारा' प्रकाशित हुआ है। उस लेख में आशुतोष ने वामपंथ को लोकतंत्र, मानवाधिकार विरोधी और हिंसा का समर्थक बताया है। आशुतोष ने अपने..
नक्सलवाद के कौन डरता है ?आजकल हर ओर नक्सलवाद की चर्चा है। सरकार नक्सलवाद से आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है। नक्सलवाद एक विचार है, शोषण और असमानता के खिलाफ। लेकिन क्या इस देश में केवल विचार से ही इंकलाब आ सकता..
पैसों के लिए बिकते ईमानअब तक तो खाने पीने के सामान में मिलावट, सब्जियों में एक विशेष प्रकार का इंजेक्शन लगाकर उन्हें रातों रात बढ़ाने, असली घी में चर्बी की मिलावट, सिंथेटिक दूध, सिंथेटिक मावा तथा नकली दवाईयां बनाने की खबरे आती थीं, लेकिन अब..
इस्लाम विरोध ही भाजपा का हिन्दुत्वहार के बाद भाजपा में घमासान मचा हुआ है। सास-बहु के झगड़ो की तरह नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। भाजपा के दो मुस्लिम चेहरों में से एक मुख्तार अब्बास नकवी कह रहे हैं, ‘मैं वरुण के भाषण..
आखिर हिंसा से नहीं बच सका मेरठआखिरकार मेरठ हिंसा से बच नहीं सका। 17 साल बाद एक बार फिर मेरठ कर्फ्यू का दंश झेलने के लिए मजबूर हो गया। लेकिन यह तय है कि यह हिंसा साम्प्रदायिक बिल्कुल नहीं है। हां, साम्प्रदायिक रुप देने की कोशिश गयी..
दूसरे धर्म की 'बहु' मंजूर, 'दामाद' नहींसदियों से यह कहा जाता है कि जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं। लेकिन हकीकत में देखने में आ रहा है कि जोड़ियां समाज और धर्म के ठेकेदार तय करते हैं। कम से कम पश्चिमी यूपी में तो यही हो रहा है।..
आस्ट्रेलिया में भारतीय, भारत में बिहारीउत्तर भारतीय लोगों को महाराष्ट्र में लठिया दिया जाता है तो यूपी और दिल्ली वाले भी ‘बिहारी’ को एक गाली के रुप में प्रयोग करते देखे जा सकते हैं। महाराष्ट्र के लोगों का भी यह कहना है कि उत्तर भारत के..
मलियानाः पीएसी तांडव के 23 साल23 मई 1987 को मेरठ के मलियाना कांड हुए 23 साल हो गए हैं। एक पीढ़ी बुढ़ापे में कदम रख चुकी है तो एक पीढ़ी जवान हो गयी है। लेकिन मलियाना के लोग आज भी उस दिन का टेरर भूले नहीं..
इसलाम के असली दुश्मन तालिबानअब इस बहस के कोई मायने नहीं रहे कि तालिबान को अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद से अपने स्वार्थ की खातिर पाला-पोसा था। अब तल्ख हकीकत यह है कि तालिबान इस आधुनिक युग में मध्ययुगीन परम्पराएं थोप रहा है। आवाम पर..
मुसलमानों का एहसान माने भाजपा1984 के लोकसभा में चुनाव भाजपा केवल दो सीटें जीतकर मर चुकी थी। केवल अन्तिम संस्कार शेष था। लेकिन राजीव गांधी की अपरिपक्व मंडली ने फरवरी 1986 में बाबरी मस्जिद पर लगे ताले को खुलवाकर बोतल में बंद जिन्न को..
'डरपोक और कमजोर नरेन्द्र मोदी'गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा है कि यदि वे मजबूत हैं तो अफजल गुरु को फांसी देकर अपनी मजबूती साबित करें। उनका यह बयान अखबारों में छपा है। साथ में एक तस्वीर छपी है। तस्वीर..
जूता मार पत्रकारिता नहीं चलेगीकभी मुंतजिर जैदी तो कभी जरनैल सिंह जैसे पत्रकार अपनी भावनाओं को जूता फेंककर अभिव्यक्त करने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि जरनैल सिंह ने किसी ऐसी समस्या की ओर ध्यान दिलाने के लिए पी चिदंबरम पर जूता नहीं फेंका, जिससे पूरे..
वरुण पर रासुका सही फैसलासंघ परिवार हिन्दुत्व और राम मंदिर के आगे कुछ भी नहीं सोच पाता। कम से कम मुझे याद नहीं पड़ता कि चुनाव की बेला में कभी उसने हिन्दुत्व और राम मंदिर का राग न अलापा हो। उसे बेरोजगारी की चिंता नहीं..