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हिन्दी » जनसंवाद » राजेश उत्साही
राजेश उत्साही

शर्ट ने किया शर्मिंदा
इस बार जब यात्रा से लौटा तो सबसे पहले मैंने अपनी एक शर्ट के बटन दुरुस्‍त किए। यह शर्ट मैं घर में भी पहनता हूं और सफर में ट्रेन में सोते समय। इस शर्ट ने मुझे इस बार शर्मिन्‍दा कर दिया।...


ऐसे सभी शिक्षकों को सलाम!
मैं पिछले दिनों उत्‍तरांचल के रुद्रपुर, जिसे अब उधमसिंह नगर के नाम से जाना जाता है,में था। प्राथमिक कक्षाओं में भाषा के कौशल को विकसित करने के लिए सुनने,पढ़ने,लिखने और अपने को अभियक्‍त करने पर जोर दिया जाता। यहां एक कार्यशाला..


बचपन, शिक्षा और खलनायक
मेरी दादी अब नहीं हैं। होतीं तो सौ साल की होतीं। वे स्‍कूल गईं, केवल कुछ दिन ही। जब हम उनसे पूछते कि उन्‍होंने स्‍कूल क्‍यों छोड़ दिया। तो वे ठेठ बुन्‍देली अंदाज में अपने मास्‍टर को कोसतीं। फिर अपनी उंगली..


मिड-डे मील के अनकहे किस्से
[झारखंड के धनबाद जिले के एक सरकारी स्कूल में पकाए गए मिड-डे मील के साथ जहरीला सांप भी पक गया और फिर वही खाना स्कूल के बच्चों को परोस दिया गया। [पढ़ें खबर] जिसे खाकर स्कूल के 70 बच्चे बीमार हो..


सृजन संकट की बोधकथा
पिछले दिनों मसूरी में सिद्ध संस्‍था में जाना हुआ। सिद्ध मसूरी की तलहटी में शिक्षा का काम कर रही है। वहां एक सेमीनार चल रहा था। विषय था ‘वर्तमान आर्थिक संकट,सभ्‍यागत अवधारणाएं एवं सौन्‍दर्य दृष्टि’ । सेमीनार का अंतिम दिन था।..


मासूम बबली का क्या कसूर था?
कलकत्‍ता में देश का भविष्‍य तय करने के लिए वोटों की गिनती की तैयारी हो रही थी। वहां से कोई 150 किलोमीटर दूर देश का भविष्‍य अंतिम सांसें गिन रहा था। चौंकिए मत। रोज की बात है। पर हम खबर होती..


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